Friday, November 23, 2012
Thursday, September 20, 2012
10:53 AM
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Saturday, August 18, 2012
1:51 AM
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जो बीत गया वो कल था,
बड़ा बेसुरा पल था!
कुछ साज़ तुम्हारे बिगड़े थे,
कुछ साज़ हमारे बिगड़े थे
अब छोड़ो क्या तकरार करें,
खताएं भी क्या याद रखें!
रुख़ पलटे तो सज़ा मिलेगी,
"हज़म" किया तो दुआ मिलेगी!
Friday, August 17, 2012
जब Zero दिया मेरे भारत ने
11:27 PM
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जब Zero दिया मेरे भारत ने ..भारत ने मेरे भारत ने ...यूँ scam न करना आसान था...देता न दशमलव भारत तो रुपये को गिराना मुश्किल था....घोटालो की फेहरिस्त बढती ही गयी ..बढती ही गयी ....ओ हो ओ हो ..... लोकतंत्र के भेस में जहाँ Autonomy राज़ करे उसकी बात सुनाते हैं भारत के रहने वाले हैं भारत की बात बताते है..
Thursday, July 26, 2012
Saturday, July 14, 2012
खामोश रात
11:36 AM
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रात खामोश है, चाँद मदहोश है!
तारों के आगोश में, हमें न होंश है!
झिलमिलाती निशा, सहलाती फिजा!
घुंघरू की तरह, आ थिरकलें ज़रा!
मन मचल जाने दे, डर पिघल जाने दे!
प्रहर के इस नीर में, अश्क घुल जाने दे!
टूटा तारा कहीं, हमने मांगी दुआ!
लम्हा मिले यही, फिर से सोलें ज़रा!
A super duper thanks to Raghav Gautam for above pic ..awesome clicked poetry failed against this click:) Thanks!
And the below one taken by Vipul Kulkarni thanks a lot yaar amazing click:) Thanks santosh saini also for helping me in finding pics:) Thanks guys!
Thursday, May 31, 2012
Street walk
2:07 PM
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i want to take a walk into the street.
a lonely walk.
I want to take a confusing move.
In this evening while moving i want to live with all my disappointments, problems, and unfulfilled aspirations. Maybe, I do not get a surprising twist. However, I will make them the strength to fight. I will find solace in doing so. I would feel happy at the expiration instead of beginning.
It might be the better way of self-churning, self-contemplation.
Probably this will not make my mind freshen up but a mild will make sure.
I want to spend an evening while walking that way.
a lonely walk.
I want to take a confusing move.
In this evening while moving i want to live with all my disappointments, problems, and unfulfilled aspirations. Maybe, I do not get a surprising twist. However, I will make them the strength to fight. I will find solace in doing so. I would feel happy at the expiration instead of beginning.
It might be the better way of self-churning, self-contemplation.
Probably this will not make my mind freshen up but a mild will make sure.
I want to spend an evening while walking that way.
Sunday, May 27, 2012
Happy days will come again.
2:04 PM
1 comment
Humm everybody says girls are the best creation of god. may i know why? why people called them Miracle of nature? why? I wish i would not be a girl...Then I would not leave my house. i would live with my own world. ohhh god i wish i could say Happy days will come again. :( Hold me!
To be continue...
Wednesday, May 2, 2012
Sunday, March 25, 2012
तरंग
12:59 AM
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गुमसुम गुमसुम बैठे हो क्यों बोलो बोलो तो ज़रा
गुपचुप गुपचुप खोये कहाँ बताओ बताओ तो ज़रा ...
भीनी भीनी सी लहर ये आयी कहाँ कहाँ से बता
महकी महकी सी ये फिजा फैली जहाँ जहाँ पर बता ...
१) चहकी ये हवा ...मचला आसमां
मन हुआ हुआ मगन आज फिर क्यू बता ...
गुमसुम गुमसुम ....
२) दिल से हुई खता ...मन पिघल गया
राज़ ये खुला खुला आज कैसे ये बता...
गुमसुम गुमसुम ...
३) तन्हाई गुनगुनायी ...वीरानी इतराई
खामोश साँझ कैसे मुस्कुराई अब बता..
गुमसुम गुमसुम ...
४) तरंग सी उठी ...कलि सी कोई खिली
बांछे खिल गयी हलचल मची ये कैसी बता ...
गुमसुम गुमसुम बैठे हो क्यों बोलो बोलो तो ज़रा
गुपचुप गुपचुप खोये हो कहाँ बताओ बताओ तो ज़रा ...
भीनी भीनी सी लहर ये आयी कहाँ कहाँ से बता
महकी महकी सी ये फिजा फैली जहाँ जहाँ पर बता ...
गुपचुप गुपचुप खोये कहाँ बताओ बताओ तो ज़रा ...
भीनी भीनी सी लहर ये आयी कहाँ कहाँ से बता
महकी महकी सी ये फिजा फैली जहाँ जहाँ पर बता ...
१) चहकी ये हवा ...मचला आसमां
मन हुआ हुआ मगन आज फिर क्यू बता ...
गुमसुम गुमसुम ....
२) दिल से हुई खता ...मन पिघल गया
राज़ ये खुला खुला आज कैसे ये बता...
गुमसुम गुमसुम ...
३) तन्हाई गुनगुनायी ...वीरानी इतराई
खामोश साँझ कैसे मुस्कुराई अब बता..
गुमसुम गुमसुम ...
४) तरंग सी उठी ...कलि सी कोई खिली
बांछे खिल गयी हलचल मची ये कैसी बता ...
गुमसुम गुमसुम बैठे हो क्यों बोलो बोलो तो ज़रा
गुपचुप गुपचुप खोये हो कहाँ बताओ बताओ तो ज़रा ...
भीनी भीनी सी लहर ये आयी कहाँ कहाँ से बता
महकी महकी सी ये फिजा फैली जहाँ जहाँ पर बता ...
Monday, January 30, 2012
Thursday, December 29, 2011
बातें कुछ अनकही सी...
11:11 AM
1 comment
बातें कुछ अनकही सी दिल में ही रह गयी...
यादें कुछ अनछुई सी आँखों में ही रह गयी...
यादें कुछ अनछुई सी आँखों में ही रह गयी...
सोचा ये नहीं था एक ऐसा पल भी आएगा ...
मन में टीस उठेगी और चेहरा मुस्कुराएगा ...
बातें कुछ अनकही सी दिल में ही रह गयी...
यादें कुछ अनछुई सी आँखों में ही रह गयी...
ख्वाबों में घर करेंगी तेरी हर एक अदा...
शाख-ए-जां पर खिलेगी बनके कली सदा...
बातें कुछ अनकही सी दिल में ही रह गयी...
यादें कुछ अनछुई सी आँखों में ही रह गयी...
आह्ट एक शबनमी सी आने को है ...
होनी एक खुशनुमा सी होने को है...
बातें कुछ अनकही सी दिल में ही रह गयी...
यादें कुछ अनछुई सी आँखों में ही रह गयी...
धीरे से एक नगमा छेड़ जाने को है ..
तराना मेरे सुरों का कोई गाने को है ...
बातें कुछ अनकही सी दिल में ही रह गयी...
यादें कुछ अनछुई सी आँखों में ही रह गयी...
मन में टीस उठेगी और चेहरा मुस्कुराएगा ...
बातें कुछ अनकही सी दिल में ही रह गयी...
यादें कुछ अनछुई सी आँखों में ही रह गयी...
ख्वाबों में घर करेंगी तेरी हर एक अदा...
शाख-ए-जां पर खिलेगी बनके कली सदा...
बातें कुछ अनकही सी दिल में ही रह गयी...
यादें कुछ अनछुई सी आँखों में ही रह गयी...
आह्ट एक शबनमी सी आने को है ...
होनी एक खुशनुमा सी होने को है...
बातें कुछ अनकही सी दिल में ही रह गयी...
यादें कुछ अनछुई सी आँखों में ही रह गयी...
धीरे से एक नगमा छेड़ जाने को है ..
तराना मेरे सुरों का कोई गाने को है ...
बातें कुछ अनकही सी दिल में ही रह गयी...
यादें कुछ अनछुई सी आँखों में ही रह गयी...
Sunday, July 24, 2011
कहानी Salary की
2:48 AM
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वो पहली तारिख का इंतज़ार करना
वो बार बार कैलेंडर देखना
वो सेलेरी को लेकर नए नए मनसूबे बांधना
आमदनी से चौगुना खर्चा निकलने पर दुखी होना
फिर उन सब में भी बचत करने की सोचना
फिर धीरे धीरे सेलेरी की तारिख का नज़दीक आना
और मजबूती से कैलेंडर पर नज़रे जमाये रहना
और फिर मालूम चलना सेलेरी तो जमा ही नहीं हुई
अनमने मन से घर को लौटना और नयी तारिख देखना
फिर से कैलेंडर को घूरना और बुझे मन से आंखे मूंदना
अगले दिन फिर से नए खयाली पुलाव पकाना
आखिरकार हरी पत्तियों का हाथ में आना
और वो ख़ुशी शब्दों में बाया न कर पाना
जल्द से जल्द घर पहुँचने को बैचैन होना
और ट्रेफिक भरी सड़क देखकर झल्लाना
घर आते ही "माँ" के सामने सीना फुलाए जाना
और उसके हाथ में पूरी की पूरी गड्डी रख देना
"माँ" का सेलेरी को मंदिर में रख देना
यह कह कर की लक्ष्मी आते ही खर्च नहीं करते
वो २४ घंटे का इंतज़ार सौ सालो जैसा लगना
अगले दिन "माँ" को हिसाब चुकते करते देखना
फिर अपनी पॉकेट मनी का हाथ में आना
उसको अपने पर्स में करीने से रखना
फिर बार बार पर्स को खोल कर देखना
फिर अपने मनसूबो को आयाम देने की सोचना
और ये सोचना अरे ये काम इतना भी ज़रूरी नहीं
अगली बार देखेंगे और पैसे फिर बचा लेना
फिर सोचना ये खरीद लू वो खरीद लू
और फिर फ़िज़ूल खर्ची समझ कर भूल जाना
करीब करीब आधा महीना इसी कशमश में गुज़ार देना
और फिर एक दिन "माँ" का कहना ज़रा कुछ पैसे देना
घर के कुछ काम बाकि रह गयी हैं पैसो की ज़रूरत है
फिर ख़ुशी खशी अपनी पॉकेट मनी "माँ" के हवाले कर देना
और फिर अपने किये समझौते पर गर्व करना!
और फिर.......
फिर से उसी पहली तारिख का इंतज़ार करना,
कैलेंडर की उसी तारिख पर सर्कल बना देना!
वो बार बार कैलेंडर देखना
वो सेलेरी को लेकर नए नए मनसूबे बांधना
आमदनी से चौगुना खर्चा निकलने पर दुखी होना
फिर उन सब में भी बचत करने की सोचना
फिर धीरे धीरे सेलेरी की तारिख का नज़दीक आना
और मजबूती से कैलेंडर पर नज़रे जमाये रहना
और फिर मालूम चलना सेलेरी तो जमा ही नहीं हुई
अनमने मन से घर को लौटना और नयी तारिख देखना
फिर से कैलेंडर को घूरना और बुझे मन से आंखे मूंदना
अगले दिन फिर से नए खयाली पुलाव पकाना
आखिरकार हरी पत्तियों का हाथ में आना
और वो ख़ुशी शब्दों में बाया न कर पाना
जल्द से जल्द घर पहुँचने को बैचैन होना
और ट्रेफिक भरी सड़क देखकर झल्लाना
घर आते ही "माँ" के सामने सीना फुलाए जाना
और उसके हाथ में पूरी की पूरी गड्डी रख देना
"माँ" का सेलेरी को मंदिर में रख देना
यह कह कर की लक्ष्मी आते ही खर्च नहीं करते
वो २४ घंटे का इंतज़ार सौ सालो जैसा लगना
अगले दिन "माँ" को हिसाब चुकते करते देखना
फिर अपनी पॉकेट मनी का हाथ में आना
उसको अपने पर्स में करीने से रखना
फिर बार बार पर्स को खोल कर देखना
फिर अपने मनसूबो को आयाम देने की सोचना
और ये सोचना अरे ये काम इतना भी ज़रूरी नहीं
अगली बार देखेंगे और पैसे फिर बचा लेना
फिर सोचना ये खरीद लू वो खरीद लू
और फिर फ़िज़ूल खर्ची समझ कर भूल जाना
करीब करीब आधा महीना इसी कशमश में गुज़ार देना
और फिर एक दिन "माँ" का कहना ज़रा कुछ पैसे देना
घर के कुछ काम बाकि रह गयी हैं पैसो की ज़रूरत है
फिर ख़ुशी खशी अपनी पॉकेट मनी "माँ" के हवाले कर देना
और फिर अपने किये समझौते पर गर्व करना!
और फिर.......
फिर से उसी पहली तारिख का इंतज़ार करना,
कैलेंडर की उसी तारिख पर सर्कल बना देना!
Thursday, December 23, 2010
Dhoop
2:30 PM
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Ek halki si dhoop kali par aayee aur
phool khila gayee,
Ek halki si dhoop aus par chamki aur
moti si jagmaga gayee,
Ek halki si dhoop chaanv par chayee aur
satrangi chata bikher gayee,
Ek halki si dhoop tan par padi aur
nayee chetna jaga gayee,
Ek halki si dhoop bhor sang aayee aur
meri subah muskuraa gayee...
phool khila gayee,
Ek halki si dhoop aus par chamki aur
moti si jagmaga gayee,
Ek halki si dhoop chaanv par chayee aur
satrangi chata bikher gayee,
Ek halki si dhoop tan par padi aur
nayee chetna jaga gayee,
Ek halki si dhoop bhor sang aayee aur
meri subah muskuraa gayee...
Wednesday, December 8, 2010
पलछिन
8:05 AM
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याद किया जब पलछिन, हर लम्हा जी उठा है,
स्मृति के आँचल में गीत आज भी ताज़ा है...
स्मृति के आँचल में गीत आज भी ताज़ा है...
सुबह जिसे सहलाती और शाम गुनगुनाती थी,
शबनम बनकर भीतर उतर जाती थी,
पलकों पर आते ही फिर बिखर जाती थी...
शबनम बनकर भीतर उतर जाती थी,
पलकों पर आते ही फिर बिखर जाती थी...
ज़िन्दगी एक गीत में ही सिमट जाती थी,
एक रचना जीने का सबब बन जाती थी,
छोटे से ख्वाब में दुनिया नज़र आती थी...
एक रचना जीने का सबब बन जाती थी,
छोटे से ख्वाब में दुनिया नज़र आती थी...
उन सपनो को जिया है इस पलछिन में,
अधूरे गीतों को गाने की ख्वाहिश कर बैठा है...
अधूरे गीतों को गाने की ख्वाहिश कर बैठा है...
याद किया जब पलछिन, हर लम्हा जी उठा है,
स्मृति के आँचल में गीत आज भी ताज़ा है...
स्मृति के आँचल में गीत आज भी ताज़ा है...
Monday, October 4, 2010
मुझे उड़ जाने दो !!!
12:26 AM
5 comments
रोको ना मुझे उड़ जाने दो ,
सुर-संगम में घुल जाने दो!
जग-जीवन के बंधन तोड़
पर मुझे यहाँ फैलाना हैं ,
बंधना नहीं है किसी धागे से ,
खुल के आज लहराना है !
रोको ना मुझे उड़ जाने दो...
इसे ना रोकना ना टोकना
सुर-संगम में घुल जाने दो!
जग-जीवन के बंधन तोड़
पर मुझे यहाँ फैलाना हैं ,
बंधना नहीं है किसी धागे से ,
खुल के आज लहराना है !
रोको ना मुझे उड़ जाने दो...
इसे ना रोकना ना टोकना
वापिस पीछे ना बुलाना ,
हंस कर है गुज़र जाना,
जाने दो मुझे है जाना ...
था कल का इरादा मेरा,
छुटा सा कोई वादा मेरा,
उसको अब गुनगुनाने दो...
रोको ना मुझे उड़ जाने दो ,
सुर-संगम में घुल जाने दो!
जाने दो मुझे है जाना ...
था कल का इरादा मेरा,
छुटा सा कोई वादा मेरा,
उसको अब गुनगुनाने दो...
रोको ना मुझे उड़ जाने दो ,
सुर-संगम में घुल जाने दो!
Thursday, September 9, 2010
एक उड़ान अभी बाकि है !!!
11:27 AM
4 comments
एक उड़ान अभी बाकि है
मंजिल की तलाश अभी बाकि है,
निकल पड़े हैं सपनो को लिए..
सपनो की पहचान अभी बाकि है
एक उड़ान अभी बाकि है..
मिल जायेगा एक रोज़ साहिल हमको
ये यकीं अभी बाकि है
एक उड़ान अभी बाकि है..
कल्पना के पंख अब खुलने को हैं
आसमान की सैर अभी बाकि है
एक उड़ान अभी बाकि है...
जीत मिलेगी या हार ये तय नहीं है
होसलो का गुमान अभी बाकि है
एक उड़ान अभी बाकि है...
रुख किया है एक नई दिशा की ओर
विशवास का जज्बा बाकि है
एक उड़ान अभी बाकि है...
एक उड़ान अभी बाकि है !!!
मंजिल की तलाश अभी बाकि है,
निकल पड़े हैं सपनो को लिए..
सपनो की पहचान अभी बाकि है
एक उड़ान अभी बाकि है..
मिल जायेगा एक रोज़ साहिल हमको
ये यकीं अभी बाकि है
एक उड़ान अभी बाकि है..
कल्पना के पंख अब खुलने को हैं
आसमान की सैर अभी बाकि है
एक उड़ान अभी बाकि है...
जीत मिलेगी या हार ये तय नहीं है
होसलो का गुमान अभी बाकि है
एक उड़ान अभी बाकि है...
रुख किया है एक नई दिशा की ओर
विशवास का जज्बा बाकि है
एक उड़ान अभी बाकि है...
एक उड़ान अभी बाकि है !!!
Monday, September 6, 2010
SMILE PLZ
11:25 PM
3 comments
Giving a slight smile doesn't cost anything. but when it appears then creates a magic. It is an exchange, which gives pleasure without spent. just a smile and you can relaxed a whole day. just a smile and you can forget all the stress.
However, it is fleeting, but beautiful memories as always remains alive. can't get richness without smile. not even so poor, that can't get it. The biggest thing is that it is identity of joyful folks and friends. It is relaxing for tired. light for frustrated. golden sunshine for the Blues. natural medicine for the problem. Therefore, neither it can forcefully be sought, nor can be purchased. It can neither be borrowed nor can be stolen. And it does not work by then, until you give it to anyone. In everyday life many people who are devoid smile. They have forgotten to smile at life's running around.
For such people can give your a precious smile.
Receives in return for a relaxed smile providers.
advantages in giving rather than getting.
I am sure you will get great comfort. so try once, it will really work..
However, it is fleeting, but beautiful memories as always remains alive. can't get richness without smile. not even so poor, that can't get it. The biggest thing is that it is identity of joyful folks and friends. It is relaxing for tired. light for frustrated. golden sunshine for the Blues. natural medicine for the problem. Therefore, neither it can forcefully be sought, nor can be purchased. It can neither be borrowed nor can be stolen. And it does not work by then, until you give it to anyone. In everyday life many people who are devoid smile. They have forgotten to smile at life's running around.
For such people can give your a precious smile.
Receives in return for a relaxed smile providers.
advantages in giving rather than getting.
I am sure you will get great comfort. so try once, it will really work..
Friday, September 3, 2010
I will fly
2:21 AM
5 comments
Aaj mujhe jee bhar kar dekh le
me fir na dikhne wali hun...
Aaj mujhse jee bhar k baat kar le
khamoshi me dhalne wali hun...
ab pinjara khali reh jayega
ye panchi to ud jayega...
bhatka hua sa raahi hai
kisi mod pe ye mud jayega...
bahot door chala jayega...
kabhi laut ke na ye aayega...
bas yaado ko taaza rakhana
uska pata mil jayega....
Ye panchi to ud jayega!!!
me fir na dikhne wali hun...
Aaj mujhse jee bhar k baat kar le
khamoshi me dhalne wali hun...
ab pinjara khali reh jayega
ye panchi to ud jayega...
bhatka hua sa raahi hai
kisi mod pe ye mud jayega...
bahot door chala jayega...
kabhi laut ke na ye aayega...
bas yaado ko taaza rakhana
uska pata mil jayega....
Ye panchi to ud jayega!!!
Friday, August 27, 2010
Footprint
11:36 PM
8 comments
Last night I had a dream, I was on the sand of the sea cold. Then I felt someone was following me.
I turned and saw. A small child, running on my footsteps.
He was putting his foot on my footprints.
I felt really there is some one who follows our footsteps.
Whatever will we leave behind, someone repeat it.
Now it is to see, what we're going to leave behind.
An ideal footstep or wrong direction.
Always move to the right direction, because you're going to leave a footprint.
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